नागपंचमी , नाग पंचमी 2020 में कब है , नाग पंचमी में नाग को दूध क्यों पिलाते हैं , नाग पंचमी क्यों मनाते है , Nagpanchami kb hai aur kyon manate hain


दोस्तों आज के इस लेख में मैं आपको बताऊँगा की नाग पंचमी क्या है और नाग पंचमी क्यों मनाते हैं , नागपंचमी की हिन्दू धर्म मे क्या मान्यता है

दोस्तों नागपंचमी भारत मे बहुत महत्व रखता है। यह एक त्योहार के रूप में भारत मे बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। सिर्फ भारत मे ही नही नेपाल तथा जहां भी दुनिया भर में हिन्दू हैं वे सभी इस त्योहार को मनाते हैं।
दोस्तों नाग या सर्प हिन्दू संस्कृति में बहुत महत्व रखता है क्योंकि नाग भगवान भोलेनाथ गले मे हार के रूप में पहनते हैं और भगवान शेषनाग, जिन्होंने त्रेता युग मे भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण और द्वापद युग के भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम के रुप मे अवतार लिया था ,उन्हें नागों का देवता माना जाता है, इसलिए हिन्दू संस्कृति में नाग बहुत महत्व रखते हैं।


नाग पंचमी साल 2020 में कब है

25 जुलाई 2020

नाग पंचमी क्या है 

नागपंचमी सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि के दिन नागपंचमी मनाई जाती है। इस दिन सर्पों की पूजा करके नागदेवता को खुश किया जाता है इस दिन सर्पों को दूध से नहला कर या सर्पों को दूध पिलाकर नाग देवता की पूजा की जाती है।
इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नागदेवता को वरदान दिया है कि जो नाग देवता की पूजा करेगा , उन्हें दूध अर्पण करेगा उसके जीवन के सारे कष्ट और संकट समाप्त हो जाएंगे तथक उसकी समस्त मनोकामना पूरी हो जाएंगी 


जीवन मे उन्नति प्राप्त करने करने के लिए और खुशहाल जीवन के लिए आपको इस दिन क्या करना चाहिए?

 नाग देवता को वरदान मिल हुआ है कि जो मनुष्य नाग पंचमी के दिन विशेष उपाय करता है उसके जीवन के सारे कष्ट और संकट समाप्त हो जाते हैं और उसके जीवन का सारी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं। यदि आप अपने जीवन की इच्छाओं को पूरी करना चाहते हैं शिक्षा में उन्नति प्राप्त करना चाहते है यदि आप अच्छी नौकरी प्राप्त करना चाहते हैं या मनचाहे वर या वधु को प्राप्त करना चाहते है तो इन उपायों को ज़रूर करें।

आप नागपंचमी के दिन यानी 25 जुलाई 2020 शनिवार को सुबह जल्दी उठें और जल्दी उठने के बाद आप शुध्द जल से स्नान करें ,
 स्नान करने के बाद आप आने घर के सभी देवी देवताओं का पूजन करें उनके बाद आप भगवान सूर्य देव की जल चढयें 
और इस आप कोई सुगंधित इत्र का प्रयोग जरूर करें क्योंकि सुगंधित इत्र नाग देवता को अत्यधिक प्रिय होता है तो आप को कोई भी सुगंधित इत्र या परफ्यूम जरूर लगाएं।
आप स्नान करने के बाद भोले बाबा , माता पार्वती , श्री गणेश तथा कार्तिक स्वामि का भी पूजन करें।
और इस दिन आपको नाग देवता का विशेष पुआ अर्चन करना चाहिए ।

वैसे तो शास्रो में प्रत्यक्ष नागदेवता के पूजन पर मनाही है तो आप घर मे नाग देवता के चित्र का पूजन भी कर सकते हैं या भगवान भोले नाथ के मन्दिर में जाकर उनके गले मे लटके हुए सर्प का पूजन भी कर सकते हैं या शिव के समीप जो नागदेवता है उनका पुजन कर सकते है उन पर जल चढ़ाएं और कच्चा दूध चढ़ाए। नागदेवता को इत्र अर्पण करें इत्र लगाने से नाग देवता अत्यंत प्रसन्न होते हैं 

यदि आप की कुंडली मे सर्प दोष है, नागदोष है या राहु केतु दोष है तो आपको ताँबे का नाग शिव मंदिर या ब्राह्मण को अर्पित करना चाहिए या फिर आप चांदी का नाग भी दान कर सकते हैं ।

नाग पंचमी क्यों मनाते हैं ?गरुड़ पुराण के अनुसार नाग पंचमी की कथा

एक समय की बात है एक गांव में एक औरे दूध बेचा करती थी और उसकी एक ही बेटी थी जो बहुत ही संस्कारी और अच्छे स्वभाव की थी उसकी माँ रोज दूध उबालकर उसे ठंडा करके उसे आंगन में रखती थी और घंटी बजती थी और फिर जितने भी सर्प होते थे वो दूध पी लेते थे उसने अपनी पुत्री से कहा था कि ये सर्प ही तुम्हरे भाई है अगर मैं नही रही तो इन्हें याद कर लेना कुछ समय बाद जब उसकी बेटी बड़ी हो जाती है और उसकी बेटी की शादी एक बहुत बड़े खानदान में होती है जिस मुखिया के घर मे शादी होती है उस मुखिया के 7 पुत्र होते है तो सबसे छोटे पुत्र से उनकी शादी होती है सातो बहुओं में सबसे छोटी बहू सबसे ज्यादा संस्कारी थी उसके बाकी बहुएं ताना मरती थी कि उसका इस दुनिया कोई भाई नही है एक मा थी वो भी मर गयी लेकिन वो किसी से कुछ नही कहती थी । श्रवण एक महीना चालू ही गया था सभी बहुओं के भाई उन्हें लेने आए बठे लेकिन छोटी बहु का कोई भाई ही नही था ऐसे में उसे बहुत दुख होता है  और रोटी है रोते रोते एक पेड़ के पास जाकर बैठ जाती है तभी शेषनाग उस पेड़ से बाहर आते है और उसे याद दिलाते हैं कि तुम्हरी मा मुझे दूध पिलाती थी अब तुम मेरी बहन की तरह हो अब तुम चिंता मत करो तुम मेरे साथ नागलोक चलो । शेषनाग मनुष्य का रूप धारण करके छोटी बहु को उसके ससुराल से अपने नागलोक ले जाते हैं वहाँ नागमाता से भी उसे बहुत प्यार मिलता है वहीं शेषनाग के छोटे छोटे सर्प हुए थे नागमाता उन्हें ठंडा दूध पिलाती थी एक दिन की बात है छोटी बहू को पता नही था कि दूध अभी तक ठंडा नही हुआ है और उसने सर्पो को दूध पीने के लिए बुला लिया जैसी उन्हीने दूध पीना शुरू किया उनका मुह जल गया उन्हें बहुत गुस्सा आया वो छोटी बहु को डसना चाहते थे लेकिन नाग माता के समझाने पर उन्होंने छोटी बहू की छोड़ दिया और शेषनाग ने छोटी बहु अपने ससुराल वापस छोड़ दिया और ये भी वादा किया कि अगले साल वो फिर आएंगे । अब छोटे सर्प भी बड़े हो चुके थे वे बदला लेना चाहते थे उन्होंने सोचा वे सावन में छोटी बहू के घर जाएंगे और उसे डस लेंगे । श्रावण का महीना शुरू हो गया था छोटी को पता था कि उसके भाई आने वाले हैं इसलिए उसने एक दिन पहले ही मीठी रोटी , ठंडा दूध फल दाल ये सब कुछ बनाकर रख दिया जैसे ही वो आये उन पर सुगधित पुष्प की वर्षा की उन्हें ठंडा दूध मीठी रोटी और फल खिलाया और अपनी गलती की माफी भी माँगी। अब सभी सर्प भाईयों को विश्वास हो गया कि उनका मुह गलती से जल गया था इसिलए सभी ने खुस होकर छोटी बहू बहुत ही सुंदर मोतियों का हर दिया और ये वचन भी दिया कि जो भी तुम्हरी तरह अबे ठंडा दूध पिलायेगा हम से सर्प दोष से मुक्त कर देंगे 
इसीलिए श्रवण मास के शुक्ल पछ की पंचमी तिथि को नागपंचमी के त्योहार मनाया जाता है।

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